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Tuesday, June 1, 2021

बिहार सरकार और दिल्ली में यूपीएससी के परीक्षार्थी

प्यारे पाठक बंधु।
आज बिहार से लाखों की संख्या में परीक्षार्थी दिल्ली आते हैं यूपीएससी की तैयारी के लिए और समय के साथ इन परीक्षार्थियों ने अनेकानेक समस्याओं को झेला है और झेल भी रहे हैं। 
कभी उनपे लाठीचार्ज तो कभी कोड़े तो कभी पत्थर बरसे, उन मासूमों को कई बार जेल भी जाना पड़ा।

दूर किसी गांव से अपने साथ सपना लिए कितना लंबा लंबा रास्ता सफर तय करके आए की चलो यूपीएससी की तैयारी करते हैं, कष्ट कितना भी उठाना पड़े उठाऊंगा परंतु तैयारी करके ऑफिसर बन के ही वापस गांव लौटूंगा: ये एक आम बिहारियों की धृढ निश्चय उनके मानसपटल पे अंकित होती है।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि जहां जा रहे हैं वहां उनके साथ कितना सौतेला और दुर्व्यवहार होगा और अपने देश में रहते हुए भी उनको परायेपन का एहसास करवाया जायेगा जैसा की उन्होंने दिल्ली के नेहरू बिहार, मुखर्जी नगर और अन्य इलाकों में झेला है।

प्यार बिहारवासियों, एक सुझाव है मेरा अच्छा लगे तो आम जन तक पहुंचाए और क्रांति को एक नया नाम दें
बिहार प्रदेश से लाखों की संख्या में छात्र आते हैं पैसे और उम्मीद लेकर की सपनों को साकार करना है दिल्ली में तैयारी करके यूपीएससी में सफल होके।
जरा सोचिए हर एक विधार्थी कितना पैसा खर्च करता है दिल्ली में, रूम रेंट, बिजली का बिल, खाने का खर्चा, पॉकेट खर्चा और किताब और पेन पेंसिल का खर्चा भी।
गौर फरमाने की बात ये है की बिहार के मुख्यमंत्री अभी तक अनभिज्ञ क्यूं बने रहे और राजनीति चमकाते रहे। बिहार के मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने हमेशा से सौतेला व्यवहार किया है दिल्ली में रह रहे परीक्षार्थियों के साथ, कभी उन लुटेरे नेताओं के मन में भी नही आया की ये बिहारी कल के भविष्य हैं और आइएस बन अपने राज्य का नाम रौशन करेंगे। ये नेतालोग यदि आम आदमी के सच्चे हितैषी होते तो उन तमाम दुख भोग रहे जुल्म सह रहे छात्रों के लिए समय समय पे न्यायोचित कदम उठाते और दिल्ली से संवाद कर मामला को सुलझाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ ना होगा, क्योंकि छात्रों की आवाज शिवाय दूसरे छात्र के कोई और नहीं सुना और वे अपनी लड़ाई खुद कष्ट झेल कर लड़ते रहे।
हमारे यहां का मुख्यमंत्री ऐसा हो जो पटना राजधानी क्षेत्र में ही यूपीएससी की तैयारी के लिए अलग से एक जगह आवंटित कर के उनका कोचिंग संस्थान के तौर पे विकसित करें, ताकि वो भविष्य में यूपीएससी हब बन कर के उभरे और अन्य राज्य से भी लोग आए तैयारी के लिए।
यदि वो बिहार और उनके लाल को चाहते हैं तो उन्हें कुछ और कदम उठाने होंगे.. जैसे की: आप सभी जानते हैं ज्यादातर यूपीएससी के तैयारी करवाने वाले शिक्षक भी बिहार से आते हैं एवं वे ही कोचिंग संस्थाएं चलाते भी हैं तो उनको विश्वास में लेना होगा की आप पटना आइए जो चीजें आपको दिल्ली में मिलती है वो चीज़ें हम आपको पटना में मुहैया करवाते हैं और फिर इस तरह से बिहार और पटना के लिए एक नए युग का शुरुआत होगा जिससे आने वाली पीढ़ी को किसी हद तक यूपीएससी सुविधाजनक और संतोषप्रद लगेगा।

इस प्रकार से बिहार से बहुतायत मात्रा में छात्रों का पलायन और उनके द्वारा लाया हुआ पैसा भी बिहार में ही रह पाएगा और जो एक समस्या रही है रंगभेद का वो हद तक सही हो पाएगा।

बिहारी परीक्षार्थी तो दशकों से नारकीय और नस्ली भेदभाव वाला जीवन तो दिल्ली में बिताते ही रहे हैं, दोष है किसका??
दोष उन हिजड़े नेताओं का है जो सत्ता में होते हुए भी उनको सौतेला बना के छोड़ दिया, उन छात्रों ने समय समय पर अपनी लड़ाई खुद लड़ी है, तो ऐसे में राज्य में सरकार किसी की हो; उन्हें तो लाभ नहीं मिला..मिला क्या??

मेरे सुझाव से बिहार का पैसा बिहार में और प्रतिभा का दोहन भी बिहार में होगा और प्रतिभा से और भी कई आयाम लिखे जायेंगे बिहार के मस्तिष्क पर। जैसा की अभी तक होता आया है: उन छात्रों का पलायन होगा बिहार से और वे अवसर ढूंढने जायेंगे और अवसरवादी दिल्ली वालो के शिकार होते चले जायेंगे। बिहारवासी कितने प्रतिभाशाली हैं ये हमारी समृद्धशाली इतिहास जानती है परंतु दुख इस बात का है की नेताओं ने अपने अपने तरीके से बिहार को लुटा और बिहारी शब्द की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया है, आज भी बिहारी शब्द कोई बढ़ोतरी या उदीयमान होने का परिचायक नही है, लेकिन वक्त रहते हम सभी एकजुट होकर बिहार और अपनी खोई पहचान के लिए संकल्पित हों आगे बढ़ सकते हैं।
आज भी बिहार के बारे में आए दिन आप पढ़ते होंगे किसी अन्य राज्य में या और अन्य देशों में की "बिहार में एक परंपरा बना हुआ है की यहां के लोग बाकी राज्यों के अपेक्षा ज्यादा सफल होते हैं यूपीएससी में और बिहारी मतलब यूपीएससी के प्रति समर्पित और पक्का आई ए एस बनने वाला"।
आज भी बिहारी ही ज्यादा सफल होते देश के सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में, फिर उन यूपीएससी के आकांक्षी छात्रों को पूरा का पूरा सुविधा पटना में ही क्यों न मिले??

जय हिंद। जय बिहार।

Saturday, December 7, 2019

नेता भारत के संदर्भ में एक परिचय...

नेताओं और उसके चाटुकारों और चाटने वालो को समर्पित:
नेता मतलब चोर हूँ मैं,
धरम-जाति के नाम पर बाँटना मेरा काम है ,
दंगे,मुठभेड़,हत्याएँ कराना मेरे लिए सब आम हैं ।
मैं न हिन्दू ; मैं न मुसलमाँ ;
मैं नेता हूँ मेरी एक अलग ज़ात है ,
थाली का बैंगन होना मेरे लिए क्या बात है ।
नेता मतलब चोर हूँ मैं ,
उदाहरण कलयुग घोर हूँ मैं ,
बिन बात का शोर हूँ मैं 

देश में महामारी के तौर पर  चीजें: नेता, मच्छर, मक्खी और ट्रैफिक जाम 1947 से अभी तक मौजूद है देश के हरेक कोने में, जो देश को हर तरीके से नुकसान पहुंचा रहा है परन्तु हम आदि हो गए हैं और यूं ही जीये जा रहे!

कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग और नेताओं द्वारा कश्मीरियों को छलना..

प्यारे देशवासियों मुद्दत से आज समय मिला कश्मीर के मुद्दे पे कुछ लिखने को, अपने विचार शेयर करने से पहले ये बताना चाहता हूँ की मै किसी भी भारतीय राजनीतिक दल को सपोर्ट नहीं करता, ना हीं मेरे विचार उन दलों  के विचार से मेल खाता है|
भारत मे जिस किसी भी दल की सरकार आई उन सबने अपने हिसाब इस भारत भूमि को लूटा है, ये पर्याप्त कारण है मेरे  नफरत का, इन राजनेताओ के लिये|
अब बात करते हैं कश्मीर की : मैं नेहरू से ले के मोदी किसी भी राजनेता को पसंद नहीं करता लेकिन 370 और 35A  का हटाया जाना स्वागात योग्य और राजनीती से पड़े  देशहित में लिया गया फैसला जान पड़ता है, यूँ तो अपने देश को बाहर से कम वरन अपने  देश  के अंदर ही  ज्यादा खतरा है, ये वही लोग हैं जो अपने आपको पढ़े लिखे और Intellectual समझते  हैं, जो पलते हैं भारतवर्ष के पैसों  पर, पर गाते हैं और जहां की, देशवासियो ये वही लोग हैं जो 1947 से अभी  तक देश लूटता  रहा है लेकिन य़े चुप रहे, जिनकी विचारधारा किसी विषेश दल के लिए है, मैं उन Lieberal से पूछना चाहता हूँ, तुम कहा थे? जब कश्मीर को जन्नत से ज़हननुम बना दिया जा रहा था, बारी-बारी से, सस्पष्ट रुप से सार्वाविदित हो की कश्मीर को लूटा गया निचोडा  गया वहां के 3 मुख्य रजनितिक दल द्वारा जो कांग्रेस, NC और PDP रहा. दोस्तो भाजपा भी कोई दूध की धूली Party नहीं है इसने भी आतंकवाद और अलगववादी रूपी दल PDP और NC के साथ सरकार बानाया और समय के साथ सत्ता का सुख भोगा  | दोस्तो 370 और 35A के बाद कुछ लोगो की जल रही है खास कर के कांग्रेस की, इस  एतिहासिक निर्णय से कांग्रेस की चाल और चारित्र  ऊजागार हो चुका है, कांग्रेस के नेताओं द्वारा दिया गया बयान काफी  है की  कांग्रेस चाहता था कश्मीर मुद्दा लटका रहे और नेताओं की लूटमारी और सत्ता का खेल सदियों तक चलता रहे, शायद यही वजह था की नेहरू ने कश्मीर को एक समस्या बना कर छोड़ दिया ताकि सदियों तक इनके नेता अपने हिसाब से कश्मीर का बेडा गर्क करते रहे और इस  समस्या का ही देन है आतंकवाद, अलगववाद और युवाओं मे बढ़ती बेरोजगारी ; 370 और 35A से   कितना लभान्वित हुआ नेता लोग या  कश्मीर के लोग ये आपको भालिभांती पता  होगा|
इस देश को सिरमोर बानाना है तो आप युवाओं को आगे आना होगा समझना होगा की क्या हम भारवाशी सिर्फ लूटने  के लिए नही बने हैं, आज भी देश में  गारीबी  विद्यामान है, भुखमरी से मौतें होती जा रही  है , युवा बेरोजगार है, कुछ बढे ना बढे जनसंख्या दिनानुदिन बढता जा रहा है, किसान आत्महत्या को मजबूर है, आज  भी आधुनिक हथियार दुसरे देशों से खरीदने को बाध्या हैं, आधुनिक चिकत्सा आज भी आम  लोगो के पहुँच से बाहर है, शिक्षा का स्तर गिरा हुआ है, रोजगारपरक शिक्षा का  अभाव नीरंतर बढता जा रहा है, प्रांतिय परंतु स्वार्थ की राजनीति का होना देश के विकास मे बाधक है परंतु दशकों  से जारी है, भ्राष्टाचार मे देश के नेताओं, पुलिस और सरकारी अधिकारिओं  द्वारा नित नया-नया  ईबारत /अध्याय  लिखा जा रहा है, एक भी Nobel Prize Winner देश मे नहीं विदेश में जा बसे कारण स्पष्ट है उनको भारत मे संभवानायें दुसरे देश के बनिस्पत नहीं  दिखता, दोस्तो राजनेताओं ने हमारे देश को लूटने के अलावे किया क्या  है, आज भी देश  की आर्थिक राजधानी मुंबई  बारिश से ड़ूब जाती है, कौन ज़िम्मेदार है इसका क्या वहां कोई सरकार  है, क्या बजट मिलता है या  पास होता है ? क्या ग्रांट नहीं आता मुंबई  के लिए? भाजपा और शिवसेना की सरकार है वहां नगर निगम और राज्य में  | सब होता है जी बस इन नेताओं को कुछ करना नहीं है देश को लूटने  और अपने  घर भरने के शिवाय| मैं आपसे एक सवाल पुछता हूँ की "Main Stream Politicians" कौन  होता है ?? मैं बाताता हूँ  आपको जी जो हमें दसकों तक लूटा हो जिस नेताओं ने हमारे देश की प्रकृतिक सम्पदा और सरकारी  सुविधाओं  को अपने  स्वार्थ  के लिए दुरूपयोग किया हो, आज भी पब्लिक मर रही है परंतु नेताओं की तरक्की अनवरत जारी है , एक Congressi मन्दबुधि  नेता राहुल गांधी का बयान  आता है (और भी  नेताओं के द्वारा भी  ऐसा  बोला गया)  की Main Stream Politicians को जेल मे  रखा गया, ये लोकतंत्र का हनन है! मैं  आप से पूछना चाहता हूँ  जब ये लोग सरकार-सरकार  खेल  रहे  थे तब  देश को लूटने के लिए तब कहाँ गया  इनका नितागीरी| दोस्तो नेताओं  ने देश को लूटने के लिए अपने तारिके से राजनीती को इस्तेमाल किया है ये आप देशवाशी कब समझोगे?? 370 और  35A के बाद कांग्रेस और अन्य दल  जो 370 और 35A को सपोर्ट कर रहे थे; की सोच, विचारधारा, चाल और चारित्र ऊजागार हो चुका है, शर्म आती है आज उनलोगो पे मुझे जो लोग दशको तक इन पर्टियों  को पूजते आएे और इसके नेताओं को भगवान के तरह  पूजा, वे लोग इस देश के बर्बादी का ज़िम्मेदार हैं, जो देश के नेताओं को भगवान की तरह पूजते हैं बजाय देश को पूजने के| इस देश के युवा को क्या  हुआ जो देश को नहीं नेताओं को पूजना पसंद करते हैं, ये युवा  य़ा तो भटक गए य़ा नेताओं के चिकनी-चुपडी बातों मे आकर सर्वस्वा भूल चुके |
देशहित  मे देश के लिए युवाओं को आगे आना ही  होगा अपने  वीर सपूतों के याद को सिने मे रख देश के लिए कुछ  करना ही होगा, मेरा कलम चल पडा है और यूँ चलता रहेगा | एक नयी  क्रांती के आस मे और बेहतर कल के लिये, आपका साथी😊
👌जय हिन्द 🇮🇳जय भारत 👍जय युवा 🙏
सौजन्य से: भारत का एक अभिन्न  अंग- एक युवा

एक गुज़ारिश..हिंदी दिवस के संदर्भ में...

👌आप सभी देश वासियों और उन सभी महानुभावों को भी जो विदेश प्रवास कर रहे हैं: 😍हिंदी दिवस की 🎉शुभकामनाएं🎊
इस संदेश के साथ आपको एक सवाल पे छोड़े जा रहा हूं..क्या हिंदी सर्वसम्मत भाषा बन पाई है?? नहीं बन पाई है तो क्यों नहीं??

आज ये विषय को जानने की जरूरत है क्युकी जिस देश में हम रहते हैं वहां की खूबी रंग, वर्णों, संस्कृति, सामाजिक व्यवस्था के मिश्रण रूपी अनेकता में एकता को दर्शाती है।
संविधान ने भारत के हरेक नागरिक को समान अधिकार दिया है चाहे वह किसी भी क्षेत्र या वर्ण का हो।

दोस्तो क्या विडंबना है हमारे देश में की नेता कहीं भी राजनीती करने से बाज नहीं आता, जब हिंदी को सर्वसम्मत भाषा के रूप में स्वीकारने की बात आती है तो कमोबेश क्षेत्रीय नेता रुकावट पैदा करते हैं ताकि उनकी राजनीति की दुकान चलती रहे, वो खुद अंग्रेजी माध्यम से ऑक्सफोर्ड या कैम्ब्रिज में पढ़े होते हैं परन्तु राजनीतिक स्वार्थ के लिए वो अन्य भाषा को स्वीकारना नहीं चाहते।
मै आपसे पूछता हूं, क्या किसी देश से प्रेम करने वाले को ये दिखनी चाहिए कि देश हित में क्या उचित है या इन सबसे पड़े होकर स्वार्थ की राजनीति करना, देश का एक एक राज्य राजनेताओं के गिरफ्त में है, वे जिस भी दिशा में ले जाना चाहते हैं ले जाते हैं, वे चाहें तो हिंदी को सर्वमान्य भाषा मान देश के तरक्की में योगदान दे सकते हैं,परन्तु नहीं ऐसे नेताओं का राजनीतिक दुकान जो हट जाएगा फिर सत्ता का सुख भी तो कोई चीज होती है।

यदि देश के हरेक जनता नेताओ को भगवान की तरह पूजना बंद कर दें तो हमारा देश स्वाबलंबी और सुबल बन पाएगा नहीं तो यूं ही हम हरेक बाहरी देश से हरेक चीज खरीदेंगे या भीख मांगेंगे और आम जन मुक दर्शक बन सबकुछ चुप-चाप सहते और देखते रहेंगे।
यदि आज भी आजादी के 72 साल बाद भी हिंदी एकमत भाषा नहीं बन पाया है उसका सरल उत्तर है राजनीतिक विद्वेष और राजनीति में सत्ता लोलुपता, यदि सच में देश के नेता इस देश को प्यार करते तो राजनीति  नहीं कर हिंदी को राष्ट्रीय भाषा बना देश को और तरक्की की राह पे ले जा रहे होते, क्षेत्रीय भषाओं की गरिमा अलग है वे नेता बिना राजनीति किए भी अपनी भाषा को बढ़ावा दे सकते हैं, परन्तु देश की किसको फिकर है, हमारे देश के जनता को राजनेताओं की चटनी है, चापलूसी करनी है, चाहे देश बर्बाद हो रहा हो।

# जागो #एक नए भारत की कल्पना #भारत की बात #स्वीकार्य और सुबल भारत  #एक भारत # Young India #Salutation2Our Martyrs #Sallutatuon 2our Farmers & Armies #Shoes4EveryPoliticiansOfIndia

देशवासियों द्वारा नेताओं की चाटना: प्रवृति या मजबूरी??

मित्रों! न्यायपालिका के फैसला को भी आप अंधभक्ति में आकर राजनीति का रंग दे रहे, क्या विडंबना है हमारे देश में: एक तो चोरों को बचाने के लिए कोई और नहीं हम सारे खड़े हो जाते हैं, दूसरा देश को जितना भी लुटा हो वो नेता उनकी चाटनी है, अंधभक्ति करनी है, चाहे वो चोर/बलात्कारी/भ्रष्टाचारी/पापी इत्यादि कुछ भी हो।हमारे देश के नेता ने हमें जितना भी लुटा हो उनको हमे बचना जरूरी है: चाहे वो घोटाले/बलात्कार/भ्रष्टाचार/गुंडागिरी में ही क्यों ना बंद हों। भाड़ में जाए सोने के चिड़िया को लूटने वाले 1947 से अभी तक के सभी राजनीतिक पार्टियां। भाड़ में जाए भाजपा, कांग्रेस और तमाम राजनीतिक दल जिनको जितना मौका मिला उतना इस देश को लुटा और लूट जारी है, तो चमचों, अंधभक्तों और चाटने वाले मैं ये पूछ रहा था कि जो "चोर" पूर्व गृहमंत्री और वित्त मंत्री ( पी चिदंबरम) भी रहा है और अभी पकड़ा गया है, सही पकड़ा गया है फिर फिर तुम्हारे हिसाब से सही कैसे नहीं है?? सारे नेता एक हैं चाहे किसी भी पार्टी का हो फिर क्यों नी समझ पा रहे हो की ये इस्तेमाल कर रहे हैं हम 140 करोड़ नागरिकों को। कांग्रेसियों ये बताओ जब ये फैसला कोर्ट द्वारा हुआ तो कैसे राजनीति ला रहे हो। चमचो, शर्म आती है तुम चाटने वालो पर जो देश के उपर इन हरामखोर नेताओ को आदर्श और सर्वोपरि मानते हो, लानत है तुमपे क्यों की ये चोर नेता तुम्हारी नसमझदरी से पनपे हैं और 1947 से इन नेताओं ने जो लूट की राजनीति की वो अनवरत अविरल जारी है। जिस भी देश में तरक्की हुई है वहां का नेताओ ने अपना सबकुछ त्यागा है ताकि देश तरक्की कर सके, हम क्रांतिकारियों और वीर सपूतों के शहादत और वीरता को भूल इन चोर नेताओ को पूजते जा रहे हैं, आप हो हमारे देश की पिछड़ापन का वजह, आने वाली पीढ़ी गालियां देंगे हमें क्यों की हमने देश को नहीं वरण चोर और भ्रष्टाचारी नेताओं को 1947 से अबतक संसद में जगह दिया और बदले में इनलोगो ने हर तरीके से देश को तोड़ा, लूटा, बदला, नर्क बनाया। बचाओ सारे नेताओं को बचाओ चारा घोटाले वाले को भी भ्रष्टाचारी और बलात्कारी को भी बचाओ इससे तुम्हारी बाफादरी उन चोर नेताओं के लिए तो जीत जाएगी लेकिन देश के लिए तुम एक बोझ बने रहोगे, जाओ जब तक विवेक नहीं जागेगी चाटो उन नेताओं की!
जागो भारत! जागो युवा! जय हिन्द 🇮🇳भारत का एक युवा, एक आभिन्न हिस्सा🙏

हमारे देश के नेता अपने पैसा से टैक्स भरने में अक्षम और हम आम लोग उसको भगवान मानने को मजबुर क्यों??

NBT: टैक्स भरने में सक्षम नहीं हैं करोड़पति नेता!
http://nbt.in/L_U0Aa?bga via @NavbharatTimes: http://app.nbt.in

ये नेता है जिन्हे तुम पूजते हो, इतना अकूत संपत्ति का मालिक होने के बाद भी ये हमारे जेब से टैक्स भरते हैं, तुम तो इन्हे भगवान की तरह पूजते हो तो जवाब भी देना। हम भारतीयों की विवेक और बुद्धि दोनों मारी गई है इन नताओं के चाटुकारिता में, ये अपने अपने तरीके से लूटने के मकसद से संविधान में बदलाव करते हैं, एक परिवर्तन आम लोगों के हित में लिया गया हो बता दो, गरीब आज भी गरीब होता जा रहा है और अमीर अमीर होता जा रहा है, मैंने सुना है भगवान अपने भक्तों से कभी दगा नहीं देता लेकिन ये नेता जिन्हें तुम भगवान मानते हो जो वास्तव में राक्षस है, जो इस देश के बर्बादी का कारण है, ये वही भगवान है तुम्हारा जो :
1. बलात्कार पे ये बयान देता है कि लड़के हैं गलतियां हो जाया करता है।
2. एक नेता बोलता है दूसरे नेत्री के बारे में की इसके अंडरवियर का क्या कलर है, आप लोगों ने 10 साल जिनसे अपना प्रतिनिधित्व कराया, उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लगे, मैं 17 दिन में पहचान गया कि इनके नीचे का अंडरवियर खाकी रंग का है.
3. 'वाह क्या गर्लफ़्रेंड है. आपने कभी देखी है 50 करोड़ की गर्लफ़्रेंड?''
4. हाथ में मोमबत्ती जला कर सड़कों पर आना फ़ैशन बन गया है. ये सजी संवरी महिलाएं पहले डिस्कोथेक में गईं और फिर इस गैंगरेप के ख़िलाफ़ विरोध दिखाने इंडिया गेट पर पहुंची.
5.प्रताड़ित महिलाओं को शायद न्याय नहीं मिलेगा क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बलात्कार की कीमत तय की हुई है.
ना जाने और भी कई सारे बयान इन नेताओं ने दिया है, अपने आकाओं से पूछना अपने आपको पूछना जिस हिसाब से ये राजनीति में भाषा का इस्तेमाल करता है, कितना जायज है। अभी तक के इतिहास में ये 5 बयान नहीं और भी विवादित बयान आते रहे जो अकल्पनीय और अशोभनीय है। इन विवादों के बीच एक दूसरे को बचाने की होड़ मचती है, हरेक राजनीतिक दल में समान रूप से बलात्कारी, लुटेरा, लोभी, हत्यारा, अपहरणकर्ता भरा पड़ा है परन्तु आपको चटनी है, एक नेता द्वारा एक 16 साल की बच्ची को प्रताड़ित किया जाता है फिर एक एक कर के उसके परिवार वालों को मार दिया जाता है, किसी एक नेताओं के बेटियों के साथ बलात्कार हुआ हो बता दो, क्युकी जो तकलीफ सहनी है वो सिर्फ देश का आम आदमी सहेगा, नेता सिर्फ राज करेगा और देश को भोग का वस्तु समझ उपभोग करेगा, लेकिन तुमलोग चाटना इनलोगो की। 
कमोबेश देश में समान माहौल है बदहाली का खस्ताहालत का परन्तु हम चाटेंगे चाहे हमारे देश में बिजली पर्याप्त ना हो, आयात ज्यादा हो निर्यात काम हो, गंदा और बदबूदार वातावरण हो, विदेशों से भीख मांगना पड़े, किसान आत्महत्या करता रहे, भुखमरी बढ़ती रहे, बेरोजगार युवा भटकता रहे, फसल बर्बाद होता रहे, उद्योग घटता रहे, हथियार तकनीक और युद्ध सामग्री बाहर देशों से मंगवाते रहें, अस्पताल में गरीबी अमीरी के आधार पर चिकित्सा हो, शिक्षा जो अंधेरे में ले जाए, आरक्षण के वजह से समाज में खाई बढ़ता रहे,रेपिस्ट नेता को मंत्रिमंडल मिले, डकैत नेता को अच्छा अवसर मिले लूटने का, घोटाले वाला नेता आइएएस को पब्लिक के सामने जलील करता रहे, चोर नेता सीनाजोरी करे सरेआम, मलेरिया डेंगू का दौर चलता रहे और आप चाटो।
जिस व्यक्ति को भारत के इतिहास का कुछ नहीं पता वो इस देश का चर्चित नेता बन जाता है और एक दल के मुख्यमंत्री का उम्मीदवार।
यहां आठवीं फेल उपमुख्यमंत्री और दसवीं पास स्वास्थ्य मंत्री बन जाता है जिसके अंदर काम करता है : सालों के मेहनत से बना कलक्टर/डॉक्टर/ अधिकारी।
यहां इतने हमले और जाने जाती है परन्तु वह नेताओं का नाम नहीं आता।
मुंबई में सात सिलसिलेवार हमला कई गरीबों की जान गई, परन्तु याद या केंडल जलाया जाता है सिर्फ अमीर के याद में जो नरीमन प्वाइंट में मारे गए, क्युकी गरीब को कौन याद रखता है??
नेता सत्ता सुख के लिए किसी भी दल में जा सकता है और कोई भी संविधान परिवर्तन कर सकता है स्वयं के लिए।
जो कोई आवाज़ उठाएं वो रातों रात गायब हो जाय करता है इस देश में।
यहां राजा के रूप में नेता महलों में वास करता है और गरीब बेघर जमीन पे या झोपड़ी में।
देश के 2 प्रतिशत लोगों के पास देश का 98% प्रतिशत संपत्ति है।
हर साल 9 हज़ार भारतीय देश छोड़ विदेश बसते जा रहे हैं, क्युकी उन्हें लगता है उनकी भविष्य सुरक्षित नही है।
युवाओं में रोष बढ़ रहा है परन्तु किसको पड़ी है, दिशा भटक गए किसको पड़ी है।
क्रांतिकारी और वीर सपूतों को भूल चोर नेताओं का याद किया जाना,  किया जाना, बहुत खलता है।
अरबों डालर गए ये भेड़िए, खरबों स्विस बैंक में है परन्तु खुलासा नी करेंगे क्युकी जिनकी करेंगे उनकी तो है ही और जो करेंगे उनकी भी तो है।
ये भेड़िए सौदा करते हैं, की आप आओ हमारे देश में अपना व्यापार बढ़ाओ परन्तु एंट्री फीस इतने अरब दौलत देने होंगे, इतना हथियार खरीदनी है परन्तु इतने खराब डॉलर कमीसन देने होंगे, टेलीकॉम कंपनी लगानी है आओ स्वागत है परन्तु इतने डॉलर घुस देने होंगे सोरी घुस नहीं उपहार के तौर पे।
ये अपने बेटे बेटियों को विदेश में पढ़ाएंगे परन्तु भाषा और राज्य के नाम पे आपस में आम लोगों को लड़ाएंगे।
ये मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयाली, भोजपुरी, अवधि आदि अन्य भाषाओं के नाम पर लड़ाएंगे  और इंग्लिश का पुरजोर विरोध करेंगे परन्तु खुद ऑक्सफोर्ड कैम्ब्रिज से पढ़े होते हैं।
भारत का हरेक शहर कमोबेश 30 मिनट का बारिश नहीं झेल सकता, क्युकी उस शहर का नीव उनके भ्रष्टाचारों पे खड़ा है, परन्तु आप चाटो।
आपको अग्रणी देश बनते देखना है तो क्या ये चोर नेता पूरा करेंगे आपकी ख्वाहिश, यह देश युवा है, इस देश को उन युवाओं की जरूरत है जो देश को एक क्रांति के द्वारा आगे ले जाए। जब तक इस देश के युवा नेताओं को नपुंसक बन चाटते रहेंगे, मुक दर्शक बन देखते रहेंगे, ये देश लूटता रहेगा, यहां बलात्कार, चोरी डकैती, घूसखोरी, अपहरण, मौत का नंगा तांडव चलता रहेगा। इतने पढ़े लिखे युवा भी एक अदना सा नेता को अपना भगवान मान बैठा है, नतमस्तक है, शायद यही वजह है कि नेताओं ने अपने तरीके से देश को नींबू की तरह निचोड़ा है, अपने स्वार्थ हित में।

बेहतर कल की आस में एक भारतीय।