आज बिहार से लाखों की संख्या में परीक्षार्थी दिल्ली आते हैं यूपीएससी की तैयारी के लिए और समय के साथ इन परीक्षार्थियों ने अनेकानेक समस्याओं को झेला है और झेल भी रहे हैं।
कभी उनपे लाठीचार्ज तो कभी कोड़े तो कभी पत्थर बरसे, उन मासूमों को कई बार जेल भी जाना पड़ा।
दूर किसी गांव से अपने साथ सपना लिए कितना लंबा लंबा रास्ता सफर तय करके आए की चलो यूपीएससी की तैयारी करते हैं, कष्ट कितना भी उठाना पड़े उठाऊंगा परंतु तैयारी करके ऑफिसर बन के ही वापस गांव लौटूंगा: ये एक आम बिहारियों की धृढ निश्चय उनके मानसपटल पे अंकित होती है।
लेकिन उन्हें क्या पता था कि जहां जा रहे हैं वहां उनके साथ कितना सौतेला और दुर्व्यवहार होगा और अपने देश में रहते हुए भी उनको परायेपन का एहसास करवाया जायेगा जैसा की उन्होंने दिल्ली के नेहरू बिहार, मुखर्जी नगर और अन्य इलाकों में झेला है।
प्यार बिहारवासियों, एक सुझाव है मेरा अच्छा लगे तो आम जन तक पहुंचाए और क्रांति को एक नया नाम दें
बिहार प्रदेश से लाखों की संख्या में छात्र आते हैं पैसे और उम्मीद लेकर की सपनों को साकार करना है दिल्ली में तैयारी करके यूपीएससी में सफल होके।
जरा सोचिए हर एक विधार्थी कितना पैसा खर्च करता है दिल्ली में, रूम रेंट, बिजली का बिल, खाने का खर्चा, पॉकेट खर्चा और किताब और पेन पेंसिल का खर्चा भी।
गौर फरमाने की बात ये है की बिहार के मुख्यमंत्री अभी तक अनभिज्ञ क्यूं बने रहे और राजनीति चमकाते रहे। बिहार के मंत्रियों और मुख्यमंत्रियों ने हमेशा से सौतेला व्यवहार किया है दिल्ली में रह रहे परीक्षार्थियों के साथ, कभी उन लुटेरे नेताओं के मन में भी नही आया की ये बिहारी कल के भविष्य हैं और आइएस बन अपने राज्य का नाम रौशन करेंगे। ये नेतालोग यदि आम आदमी के सच्चे हितैषी होते तो उन तमाम दुख भोग रहे जुल्म सह रहे छात्रों के लिए समय समय पे न्यायोचित कदम उठाते और दिल्ली से संवाद कर मामला को सुलझाते, लेकिन ऐसा नहीं हुआ ना होगा, क्योंकि छात्रों की आवाज शिवाय दूसरे छात्र के कोई और नहीं सुना और वे अपनी लड़ाई खुद कष्ट झेल कर लड़ते रहे।
हमारे यहां का मुख्यमंत्री ऐसा हो जो पटना राजधानी क्षेत्र में ही यूपीएससी की तैयारी के लिए अलग से एक जगह आवंटित कर के उनका कोचिंग संस्थान के तौर पे विकसित करें, ताकि वो भविष्य में यूपीएससी हब बन कर के उभरे और अन्य राज्य से भी लोग आए तैयारी के लिए।
यदि वो बिहार और उनके लाल को चाहते हैं तो उन्हें कुछ और कदम उठाने होंगे.. जैसे की: आप सभी जानते हैं ज्यादातर यूपीएससी के तैयारी करवाने वाले शिक्षक भी बिहार से आते हैं एवं वे ही कोचिंग संस्थाएं चलाते भी हैं तो उनको विश्वास में लेना होगा की आप पटना आइए जो चीजें आपको दिल्ली में मिलती है वो चीज़ें हम आपको पटना में मुहैया करवाते हैं और फिर इस तरह से बिहार और पटना के लिए एक नए युग का शुरुआत होगा जिससे आने वाली पीढ़ी को किसी हद तक यूपीएससी सुविधाजनक और संतोषप्रद लगेगा।
इस प्रकार से बिहार से बहुतायत मात्रा में छात्रों का पलायन और उनके द्वारा लाया हुआ पैसा भी बिहार में ही रह पाएगा और जो एक समस्या रही है रंगभेद का वो हद तक सही हो पाएगा।
बिहारी परीक्षार्थी तो दशकों से नारकीय और नस्ली भेदभाव वाला जीवन तो दिल्ली में बिताते ही रहे हैं, दोष है किसका??
दोष उन हिजड़े नेताओं का है जो सत्ता में होते हुए भी उनको सौतेला बना के छोड़ दिया, उन छात्रों ने समय समय पर अपनी लड़ाई खुद लड़ी है, तो ऐसे में राज्य में सरकार किसी की हो; उन्हें तो लाभ नहीं मिला..मिला क्या??
मेरे सुझाव से बिहार का पैसा बिहार में और प्रतिभा का दोहन भी बिहार में होगा और प्रतिभा से और भी कई आयाम लिखे जायेंगे बिहार के मस्तिष्क पर। जैसा की अभी तक होता आया है: उन छात्रों का पलायन होगा बिहार से और वे अवसर ढूंढने जायेंगे और अवसरवादी दिल्ली वालो के शिकार होते चले जायेंगे। बिहारवासी कितने प्रतिभाशाली हैं ये हमारी समृद्धशाली इतिहास जानती है परंतु दुख इस बात का है की नेताओं ने अपने अपने तरीके से बिहार को लुटा और बिहारी शब्द की अस्मिता के साथ खिलवाड़ किया है, आज भी बिहारी शब्द कोई बढ़ोतरी या उदीयमान होने का परिचायक नही है, लेकिन वक्त रहते हम सभी एकजुट होकर बिहार और अपनी खोई पहचान के लिए संकल्पित हों आगे बढ़ सकते हैं।
आज भी बिहार के बारे में आए दिन आप पढ़ते होंगे किसी अन्य राज्य में या और अन्य देशों में की "बिहार में एक परंपरा बना हुआ है की यहां के लोग बाकी राज्यों के अपेक्षा ज्यादा सफल होते हैं यूपीएससी में और बिहारी मतलब यूपीएससी के प्रति समर्पित और पक्का आई ए एस बनने वाला"।
आज भी बिहारी ही ज्यादा सफल होते देश के सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में, फिर उन यूपीएससी के आकांक्षी छात्रों को पूरा का पूरा सुविधा पटना में ही क्यों न मिले??
जय हिंद। जय बिहार।

Waw . It's a nice line for UPSC students
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